: गब्बर सिंह टैक्स ने किसानों को लूटा - पीएम मोदी किसानों से करें आत्मावलोकन“पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव का प्रधानमंत्री को खुला पत्र
Vinod Chouksey
Tue, Sep 23, 2025
भोपाल/23 सितम्बर 2025/, पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स), जिसे किसानों ने ‘गब्बर सिंह टैक्स’ की संज्ञा दी है, की कमियों और उससे किसानों पर पड़ी गहरी मार को उजागर किया है। अरुण यादव ने कहा कि वे यह पत्र एक “कांग्रेस नेता“ नहीं, बल्कि एक “गब्बर सिंह टैक्स के मारे, पीड़ित किसान“ की हैसियत से लिख रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधा सवाल किया कि जीएसटी के नाम पर किसानों को पिछले आठ सालों में लूटकर सरकार ने कितना राजस्व इकट्ठा किया है, यह देश के सामने रखा जाए।
किसानों की जेब काटकर राहत का ढोंग
श्री यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक ओर किसानों को मात्र 4-6 हजार रुपये सालाना देने का दिखावा किया, जबकि दूसरी ओर कृषि उपकरणों, ट्रैक्टरों और रसायनों पर भारी-भरकम जीएसटी लगाकर किसानों की जेब काट ली। उन्होंने कहा - “आपने एक हाथ से राहत दी, तो दूसरे हाथ से ‘गब्बर सिंह टैक्स’ के माध्यम से अन्नदाता को बेहिसाब लूटा।”
कृषि मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुआ खुलासा
श्री यादव ने याद दिलाया कि 6 सितम्बर 2025 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों पर जीएसटी दरें कम करने से होने वाले फायदों की बात कही थी। चौहान के बयानों को उद्धृत करते हुए अरुण यादव ने कहा - मध्यप्रदेश में प्रतिवर्ष 55 से 60 हजार ट्रैक्टर बिकते हैं। पिछले आठ सालों में करीब 5 लाख ट्रैक्टर बिके। नई दरें लागू होने पर प्रति ट्रैक्टर किसानों को 32 से 65 हजार रुपये तक की बचत होगी। देशभर में हर वर्ष 9 लाख से अधिक ट्रैक्टर बिकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अब यह बचत बताई जा रही है, तो पिछले आठ वर्षों में किसानों से जीएसटी के नाम पर कितना अतिरिक्त वसूला गया?
कृषि उपकरण और रसायनों पर भी भारी टैक्स
यादव ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में देश में कृषि उपकरण और रसायनों का 1232.20 अरब रुपये का कारोबार हुआ। यदि पिछले आठ वर्षों का हिसाब लगाया जाए, तो करोड़ों किसानों से जीएसटी के नाम पर अकल्पनीय रकम वसूली गई है। उन्होंने मांग की कि सरकार इनका सटीक ब्योरा देश के सामने रखे।
15 अगस्त के वादे और 22 सितम्बर का संबोधन
अरुण यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को किसानों के प्रति संवेदना और समर्थन की बातें की थीं। किसानों को उम्मीद थी कि 22 सितम्बर के राष्ट्र के नाम संबोधन में किसानों के लिए राहत की घोषणा होगी। लेकिन प्रधानमंत्री का भाषण “घड़ियाली आंसुओं“ से ज्यादा कुछ नहीं था। किसानों को पूरी तरह निराशा हाथ लगी।
चुनावी मजबूरी बनाम किसानों का दर्द
अरूण यादव ने कहा कि आने वाले बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए, किसानों को राहत की उम्मीद थी। लेकिन प्रधानमंत्री ने एक बार फिर “विश्वासघात“ किया।
अरुण यादव की प्रधानमंत्री से मांग
- ‘गब्बर सिंह टैक्स’ की पुनः समीक्षा कर किसानों को वास्तविक राहत दी जाए।
- पिछले 8 वर्षों में किसानों से वसूली गई राशि का पारदर्शी ब्योरा जारी किया जाए।
- उद्योगपतियों से टैक्स लेकर किसानों को राहत पहुंचाई जाए।
- देश की रीढ़ अन्नदाता को वास्तविक न्याय और सम्मान दिया जाए।
अंत में श्री यादव ने प्रधानमंत्री से आत्मावलोकन और पश्चाताप स्वरूप किसानों को राहत देने की अपील की।
जनसंपर्क अधिकारी
माननीय श्री अरूण यादव जी

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