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दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में आयोजित मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम द्वारा भ : दिल्ली में धर्म संदेश दिया गया।

Vinod Chouksey

Mon, Dec 8, 2025
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दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में आयोजित मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम द्वारा भक्ति एवं आंतरिक उत्थान के प्रयास की भावना को सुदृढ़ किया गया

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की दिव्य कृपा एवं निर्देशन से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में अत्यंत प्रेरणादायी मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन सम्पन्न हुआ। आज के समय में, जब तनाव और भय से मानवता ग्रस्त व त्रस्त है, ऐसे में इन सत्संग कार्यक्रमों से मिलने वाली प्रेरणाएं एक शक्तिशाली आधार बनकर व्यक्ति को उसकी अंतरात्मा से पुनः जोड़ती हैं। परिणामस्वरूप, व्यक्ति अधिक अर्थपूर्ण, शांतिपूर्ण और आनंदमय जीवन जी पाता है।

भावपूर्ण भक्ति संगीत ने एक शांतिपूर्ण व दिव्य वातावरण निर्मित किया, जिससे सत्संग के बीज बोने के लिए उपयुक्त आधार तैयार हुआ, जिसमें जीवन रूपांतरित करने की क्षमता है। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के प्रचारक शिष्यों एवं शिष्याओं ने विभिन्न उदाहरणों व दृष्टांतों से यह स्पष्ट किया कि जीवन की यात्रा में एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु प्रकाश-स्तंभ के समान हैं, जो मानव की अंतर यात्रा का मार्ग प्रकाशित व प्रशस्त करते हैं। अन्यथा अक्सर आधुनिक जीवन के शोर, भ्रम और विचलनों से यह मार्ग ढका छिपा ही रहता है। आज के इस आपाधापी भरे जीवन में, जहाँ लोग भावनात्मक अस्थिरता और सूचना के अतिरेक से जूझ रहे हैं, एक पूर्ण गुरु का जीवन में सान्निध्य और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है। पूर्ण गुरु केवल शाश्वत ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि शिष्य को जीवन की गहराईयों से भी परिचित कराते हैं, जिसके बाद वह भय, संदेह और आंतरिक अव्यवस्था से ऊपर उठ पाता है।

सत्संग में आगे कहा गया कि शिष्य का अपने गुरु के प्रति वास्तविक कर्तव्य आंतरिक समर्पण, अटूट श्रद्धा और सच्ची आज्ञाकारिता में निहित होता है। सच्चा शिष्य गुरु के उपदेशों के अनुरूप अपने विचार, वाणी और कर्मों को ढालकर ही अपनी निष्ठा का परिचय देता है। अंततः, गुरु के निर्देशों का पालन करने से लाभ शिष्य को ही मिलता है। कारण कि अनुशासन, ध्यान और आत्मावलोकन का हर कदम मन को तराशता है, हृदय को शुद्ध करता है और आत्मा के परमात्मा से संबंध को मज़बूत बनाता है।

कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक ध्यान सत्र के साथ हुआ, जिसके पश्चात सामूहिक भंडारा आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पुनः एक बार शिष्यों के लिए उनकी भक्ति और आत्मिक संकल्प को दृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।

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Bhart dharm sandesh।

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