Sat 14 Mar 2026

ब्रेकिंग

108 कुंड का शोभा यात्रा कलश यात्रा निकाली।

बरमान मेले का जिला नरसिंहपुर।

संगठन में पदाधिकारीचुने गए।

मंत्री प्रहलाद पटेल ने बरमान मेले का शुभारंभ किया

सच्चे देश के मार्गदर्शक विवेकानंद जी।

सुचना

: गुरू पूर्णिमा पर विशेष<br>चल सतयुग की ओर..श्रीश्री बाबाश्री<br>जब सब अपने - अपने गुरु भगवान का स्मरण अपनी - अपनी आस्था और श्रद्धा के अनुसार कर रहे हैं तब वह गुरूमूर्ति हमारे सामने बरबस आ ही जाती है, जो अपने आप को गुरु मानती ही नहीं है। आज अनेक तथाकथित गुरू घंटाल आरोप सिद्ध होकर जेलों में अवरूध्द है, जिनका लौकिक साम्राज्य धन्नासेठों को मुंह चिढ़ाता है । आज जब अनेक गुरू राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की तरह प्रचार - प्रसार में लिप्त दिखाई देते हैं और अनेक पदवीधारी गुरू अपने मुंह मिया मिट्ठू बनते दिखाई देते हैं तब अपनी कुटिया में सतत् साधनारत एक महायोगी की छवि स्मृति में साकार हो जाती है वह छवि है ब्रह्मलीन परम पूज्य श्री श्री बाबा श्री जी की ।<br>परम पूज्य श्री श्री बाबा श्री विगत 21 जनवरी 2021 को ब्रह्मलीन हुए, परंतु आज भी गरीब से अमीर तक, अनपढ़ से बुद्धिजीवियों तक, अकर्मण्यों से परमकुशल कर्म योगियों तक सबको भलीभांति मालूम है कि श्री भी बाबा भी कौन है । उनकी समाधि सत्यसरोवर धाम में है, जो गोटेगांव के समीप बगासपुर में स्थित है। ज्ञानियों से लेकर विज्ञानियों तक, सामाजिक, राजनीतिक, लेखकों, साहित्यकारों और सामाजिक सरोकारों से यश और पदक पाने वाले तक उन्हें याद करते हैं।<br>अनेक प्रचलित पंथों की तरह व्यवहार, व्यापार और त्योहारों की परंपरा से अलग स्वधर्म, निजधर्म की प्रेरणा देने वाले अपने वंश कुल और अपने ही गुरु की परंपरा को पोषित करवाने वाले परम पूज्य श्री श्री बाबा श्री ने श्री निर्तिकार पथ की प्रेरणा अपने सानिध्य - सत्संग में आने वाली प्रत्येक देह (आत्मा ) को बिना किसी भेदभाव के अहर्निष प्रदान की। 40 वर्षों से अहर्निष चलने वाला यह क्रम उनके ब्रह्मलीन होने तक चलता रहा। चाहे सत्संग स्थल ग्रामीण हो या महानगरी हो, देश विदेश के जिज्ञासुओं की जिज्ञासा वाचिक और प्रायोगिक रूप से उन्होंने शांत कराई। कर्मविधिओं यानी दैनिक कार्य व्यवहार का सूक्ष्मता से पालन कराया गया । विधि पूर्वक कार्य करने के सुपरिणाम का एहसास जिज्ञासुओं को कराया गया और आदेशित किया गया कि जाअ , ,खूब कमाओं और यहां कम आओ। ऐसा ज्ञानदाता , ऐसा दानदाता, ऐसा रखवाला ऐसा परखवाला और कहा मिलेगा भी निर्विकार पथ को पंथ में बदलने की स्वाभाविक कोशिशों पर विराम लगाया । गुरूता का गुरूर, शिष्यत्व के सुरूर पर अंकुश कसा, इसीका ही परिणाम था कि सत्संग का अनवरत क्रम उनके रहने तक जारी रहा और आज भी लोग उन्हें मानते हैं। जानते तो सब लोग हैं पर मानते कम ही हैं और जो मानते भी हैं तो संकल्प - विकल्प में फंसकर भटक और अटक जाते हैं। पर जो सच्चे मन से मानते और कर्मविधियों का पालन करते हैं वे पा भी जाते हैं और पार भी हो जाते

Vinod Chouksey

Fri, Jul 23, 2021
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हैं इस भवसागर से, क्योंकि परम पूज्य श्री बाबा श्री की वाणी वैभव से वे भव पार नहीं होते, सत्य प्रमाणित हो जाती है ।
सच्चाई, सफाई, अच्छाई को पढ़ाने वाला ऐसा गुरूऔर कहां मिलेगा ? आपके गुरु को ही अपना गुरु मनवाने वाला ऐसा गुरु कहां मिलेगा? संयम और नियम का कठोरतापूर्वक पालन करवाने वाला गुरु कहां मिलेगा ? अपना, अपने वाला और अपनाने वाला गुरु कहां मिलेगा? किसी से कोई शिकायत ना रखने वाला गुरू कहां मिलेगा? आज जब मानव सुविधा और दुविधा की अंधेरी गलियों में भटक रहा है, खाद्य - अखाद्य का भेद किये बिना गटक रहा है, पगडंडियों को राजमार्ग समझ अपने पैर पटक रहा है , सामने विकल्पों की दीवार खड़ी है तब जरूरत है। किसी नुकीली सुई से उस दीवार में छेदकर सुराख बनाने की जिससे भगवान भास्कर की तरह सत्य प्रकाशित हो सके और इसका सामर्थ केवल परम पूज्य श्री श्री बाबा श्री जी के श्री धरणों के सानिध्य में ही संभव है ।
गुरू में गुरुता की जरूरत है तो शिष्य में भी समर्पण और कर्तत्व की एक तरफा प्रेम और उसके परिणाम की आकांक्षा व्यर्थ है । कृपा कोई शाब्दिक सांत्वना नहीं, कर और पा श्री श्री बाबा श्री जी की सुस्पष्ट उद्घोषणा है ।
श्री निर्विकार पथ के प्रणेता परम पूज्य श्री श्री बाबा भी जी केवल दैहिक गुरु नहीं, आत्मिक , आध्यात्मिक परम गुरु हैं जिन्हें भाव प्रिय हैं, हमारे विकारों का भोजन प्रिय है।
30 वर्षों से निरंतर निराहार रहते हुए , पारम्बा रेवा की सेवा में संलग्न, साधकों और सुधारकों को प्रेरणा देने और कर्म विधियों का अमृत कलश लेकर इसे लुटाने और बांटने को आतुर मां का यह लाल, श्वांस चलते तक ललकारता रहा- चल सतयुग की । ओर अपनी करनी सुधारों और सतयुग में प्रवेश पाओ ।
आज जब गुरु की महिमा और गरिमा को स्मरण किया जा रहा है तब सबके साथ इस सद्गुरू , परमगुरु को भी हम सब अपनी विनयांजलि प्रस्तुत करते हैं। श्री सत्य सनातन धर्म की जीवंत प्रतिमूर्ति, साधना का कालिकावतार और प्रेरणा का गंगप्रवाह सा । तेजस्वी , ओजस्वी प्रकाश पुंज जो सच्चे रास्ते पर बिना भेदभाव सभी को चलाने का पुण्य प्रयास कर रहा है ऐसे तपस्वी , मनस्वी और यशस्वी पितृवत परमगुरू को सबकी ओर से सादर प्रणाम, क्योंकि सत्य को प्रमाण की नहीं , प्रणाम की आवश्यकता है । शत् - शत् प्रणाम ।
-हाकम सिंह गुर्जर, निर्विकार पथिक

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