: दादा धूनीवाले के वटवृक्ष की महिमा अलग दादा धुनी वालों ने की थी तपस्या यहां
Vinod Chouksey
Tue, Dec 28, 2021
हजारों साल पुराना वटवृक्ष की महिमा निराली संत दादा जी धुनी वालों का पहला तब स्थल
आज हम आपको बता रहे हैं एक वट वृक्ष की महिमा 5 से 6 हजार साल पुराना बट वृक्ष जो कि अपने आप में एक सिद्ध स्थान बना हुआ है जहां पर मां नर्मदा के पुजारी मां नर्मदा भक्त गौरी शंकर महाराज की जमात रुका करती थी उस जमात में संत दादाजी धूनीवाले अपनी सेवाएं संतो को दिया करते थे सालों बीतने के बाद दादाजी धूनी वालों ने इस वटवृक्ष के नीचे एक गुफा बनाकर अपना स्थान बनाया और मां नर्मदा की तपस्या की सालों बीतने के बाद यहां पर एक चरवाहे ने दादाजी को एक बामी में देखा और यह स्थान दादाजी धूनी वालों का पहला स्थान लीला स्थान बन गया हम आपको बता दें इस बट वृक्ष के नीचे आज भी संतो द्वारा प्रसादी भंडारे आराधना पूजा पाठ किया जाता है आज इस वट वृक्ष के नीचे शिव अवतारी दादा जी धुनी वालों के भक्त संत शिवानंद महाराज द्वारा यहां पर धूनीजलाकर दादाजी को याद कर प्रसादी भंडारा किया जा रहा है कन्या भोजन बड़े-बड़े भंडारे यहां पर चल रहे हैं हम आपको बता दें दादाजी धूनीवाले जिन की समाधि स्थल खंडवा में है और पूरे भारतवर्ष में दादाजी धूनी वालों का पहला स्थान साईं खेड़ा विकासखंड ग्राम पंचायत श्री श्री संदूक एक किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारी स्थान ब रिया घाट यह है जहां पर आज भी संतों का आना जाना मां नर्मदा परिक्रमा वासियों का आना जाना रहता है सच में इस वट वृक्ष की महिमा निराली है मध्य प्रदेश सरकार केंद्र सरकार इस स्थान को सुंदरीकरण करें जिससे यह स्थान पूरे देश में पहचाना जाए इसी संबंध में हमने आज यहां पर दर्शन करने आए भक्तों चर्चा दौरान जानकारी ली हम आपको बता दें जो भी यहां आता है वह एक ही बात कहता है भज लो दादाजी का नाम भज लो हरि हरिहर जी का नाम भज लो मोनी दादाजी का नाम श्रद्धा अनुसार बोलता है और मां नर्मदा के जयकारे लगाता है
खास रिपोर्ट
नरसिंहपुर जिला गाडरवारा तहसील से विनोद चौक से की

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