“स्मार्ट मीटर नहीं — Spy मीटर”: हर नागरिक की निगरानी, हर घर की हो रही जासूसी, कंपनी का है पाकिस्तानी कनेक्शन — राज्य सरकार और केंद्र को तत्काल जवाब देना चाहिए: उमंग सिंघार
भोपाल में आज नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना के संबंध में गंभीर सुरक्षा, गोपनीयता और धनराशि- दुरुपयोग के आरोपों के साथ प्रेस वार्ता की। प्रशासकीय निर्णयों, ठेकों, कंपनियों के विदेशी संपर्क एवं तकनीकी जोखिमों को सामने रखते हुए सरकार व डिस्कॉम से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग प्रस्तुत की गई।
परियोजना का दायरा एवं स्थिति
केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्यक्रम युद्धस्तर पर चल रहा है।
मध्यप्रदेश में अब तक मात्र 18% स्मार्ट मीटर इंस्टॉल हुए हैं।
नागरिकों में बिजली बिल में वृद्धि, गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं।
स्मार्ट मीटर मिशन की राष्ट्रीय टाइमलाइन
वर्ष
चरण
विवरण
मार्च 2015---NSGM का शुभारंभ---स्मार्ट ग्रिड एवं मीटरिंग हेतु राष्ट्रीय मिशन चलाया गया।
दिसंबर 2019---केंद्र की अधिसूचना----आदेश: 1 अप्रैल 2020 से नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर से।
जुलाई 2021---RDSS योजना---2026 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य।
पूरे देश में स्मार्ट मीटर का कार्य तेज़ी से बढ़ रहा है।
राज्य में करीब 1,33,44,401 मीटर स्वीकृत हुए, जिनमें से मात्र 24,96,684 (18.7%) इंस्टॉल हो सके हैं।
प्रमुख कंपनियों और ठेके संबंधी आरोप कंपनियां
Alfanar (मुख्यालय: सऊदी अरब), EsyaSoft Technologies (मुख्यालय: दुबई), Landis & Gyr (यूपी-हरियाणा में पहले ब्लैकलिस्ट)
मध्यप्रदेश के पूर्व, मध्य एवं पश्चिम क्षेत्र डिस्कॉम शामिल
अप्रैल 2024 में Adani ग्रुप द्वारा EsyaSoft में 49% हिस्सेदारी अधिग्रहण
ठेके और लागत
22 सितम्बर 2023: पश्चिम डिस्कॉम ने अल्फानार को दस्तावेज कमी के चलते ठेका देने से मना किया।
05 जनवरी 2024: पूर्व डिस्कॉम ने अल्फानार को ₹897 करोड़ का ठेका दिया।
10 जनवरी 2024: मध्य डिस्कॉम ने अल्फानार को लगभग ₹1,100 करोड़ का ठेका दिया।
कुल अनुमानित लागत: ₹2,000 करोड़।
पात्रता और नोटिस
अल्फानार को अयोग्य घोषित किया गया था, फिर भी करोड़ों के संवेदनशील ठेके दिए गए।
पूर्व डिस्कॉम द्वारा 3 बार termination notice दिए जाने के बाद भी अल्फानार सक्रिय है।
विदेशी लिंक और सुरक्षा संबंधी आशंका
पाकिस्तानी कनेक्शन
परियोजना GM ज़हर इकबाल शाह और संपर्क अधिकारी नईम अब्बास — दोनों पाकिस्तानी नागरिक।
अक्टूबर 2024 में अल्फानार ने पाकिस्तान सरकार के साथ MoU साइन किया, Overseas Employment Corporation स्थापित किया गया।
कंपनियों की subsidiary पाकिस्तान/बांग्लादेश में; DPIIT आदेश के अनुसार ऐसे देशों की कंपनियों के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक।
KYC व डेटा संग्रह
स्मार्ट मीटर KYC: आधार, वोटर आईडी, पैन, बैंक खाता, जाति, भूमि जैसी संवेदनशील जानकारी ली जा रही है।
डेटा की सुरक्षा, लोकेशन, और नियंत्रण की पारदर्शिता नहीं।
विदेशी कंपनियों से डेटा विदेश जाने की आशंका।
थिंक-टैंक व सरकारी चेतावनी
India Smart Grid Forum (ISGF) एवं भारत सरकार (DPIIT) द्वारा चेतावनी दी गई कि यह प्रोजेक्ट्स राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
कई प्रबंधन अधिकारी पाकिस्तानी नागरिक — यह भी रिपोर्ट में स्पष्ट।
Landis & Gyr की स्थिति
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में घटिया HT मीटर के कारण blacklist; फिर भी मध्यप्रदेश डिस्कॉम ने ही इन पर भरोसा किया।
साइबर सुरक्षा खतरे
संभावित तकनीकी हमले: Bad Data Injection, Spoofing, Man-in-the-middle Attack, Virus/Trojan firmware update, DDoS, Energy Theft।
पूरे भारत में ~25 करोड़ मीटर प्रत्येक एक एंट्री-पॉइंट बने हुए हैं — यह राष्ट्रीय ग्रिड, नागरिक डेटा व गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा है।
कमजोर नेटवर्क, एन्क्रिप्शन, असुरक्षित फर्मवेयर अपडेट, और निजी डेटा की चोरी का जोखिम।
प्रमुख सवाल सरकार एवं डिस्कॉम से
अल्फानार को पहले अयोग्य घोषित किया गया, फिर बड़े संवेदनशील ठेके क्यों दिए?
Alfanar-Esyasoft कार्य में Pakistan-linked personnel, MoU और विदेशी manpower की पारदर्शिता?
DPIIT पूर्व अनुमति (Rule-144(xi)) को लेकर क्या स्पष्टीकरण है?
Adani की 49% हिस्सेदारी के बाद किसी तरह की नैतिक/कानूनी जांच क्यों नहीं?
नागरिकों के KYC डेटा की सुरक्षा, नियंत्रण और लोकेशन पर सार्वजनिक विवरण दें।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा:
यह मामला केवल मीटर इंस्टॉलेशन या बिल वृद्धि का नहीं बल्कि राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर निजता, आर्थिक और सामरिक सुरक्षा से जुड़ा है। हम, विपक्ष, राज्य व केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि सभी ठेकों, डेटा सुरक्षा, विदेशी लिंक की गहन जांच हो एवं जनता के हितों व संवैधानिक अधिकारों पर किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
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